ABOUT SHYAM BABA / परिचय
वीर बर्बरीक की गाथा, शीश दान का अनुपम त्याग, और कलयुग के अवतारी बाबा श्याम का संपूर्ण इतिहास।
THE LEGEND OF BARBARIK / वीर बर्बरीक की कथा
महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच व मोरवी के पुत्र थे। उन्हें बाल्यकाल से ही युद्ध कला में निपुणता प्राप्त थी। भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्होंने तीन ऐसे अमोघ बाण (तीन बाण) प्राप्त किए, जिनसे वे ब्रह्मांड की किसी भी सेना को क्षण भर में परास्त कर सकते थे।
बर्बरीक का संकल्प था कि महाभारत युद्ध में जो पक्ष हारेगा, वे उनकी ओर से लड़ेंगे। भगवान श्रीकृष्ण यह भली-भांति जानते थे कि यदि बर्बरीक युद्ध में उतरे, तो कौरवों की निश्चित हार के समय वे पाण्डवों के विरुद्ध हो जाएंगे और विनाश अवश्यंभावी होगा। बर्बरीक की परीक्षा लेने हेतु कृष्ण ने उनसे पीपल के वृक्ष के सभी पत्तों को एक ही बाण से छेदने को कहा। बर्बरीक ने पलक झपकते ही बाण चलाकर वृक्ष के सभी पत्तों को छेद दिया, यहाँ तक कि कृष्ण के पैर के नीचे दबे पत्ते को भी बाण ने भेद दिया।
रणभूमि की शुद्धि और पांडवों की विजय सुनिश्चित करने हेतु श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान स्वरूप उनके मस्तक (शीश) की याचना की। धर्म की मर्यादा और मर्यादा पुरुषोत्तम की इच्छा का सम्मान करते हुए, बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश काटकर कृष्ण को अर्पित कर दिया। इस महात्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलयुग में तुम्हें मेरे ही नाम "श्याम" से पूजा जाएगा और तुम भक्तों के सभी कष्टों को हरने वाले "हारे का सहारा" कहलाओगे।
HISTORY OF KHATU DHAM / खाटू धाम का इतिहास
बर्बरीक का शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में दफनाया गया था। कलयुग की शुरुआत में, एक गाय जब उस स्थान पर चरने आती थी, तो उसके थनों से स्वतः ही दूध की धारा बहने लगती थी। ग्रामीणों द्वारा खुदाई करने पर वहां बर्बरीक का दिव्य शीश प्रकट हुआ।
तत्कालीन शासक राजा रूपसिंह चौहान को स्वप्न में आदेश प्राप्त हुआ कि वे इस पवित्र स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाएं और शीश को वहां स्थापित करें। संवत 1084 (ईस्वी 1027) में मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को शीश की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
कालांतर में, ईस्वी 1720 में मारवाड़ के दीवान अभय सिंह के आदेश पर मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे इसे वर्तमान भव्य और नक्काशीदार स्वरूप मिला। आज खाटू धाम संपूर्ण विश्व के करोड़ों सनातनियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
TRUSTEE BOARD / ट्रस्टी मंडल
श्री श्याम मंदिर कमेटी खाटूधाम के समर्पित ट्रस्टीगण मंदिर की समस्त व्यवस्थाओं, दर्शनार्थियों की सुरक्षा, निःशुल्क चिकित्सा, भंडारा, धर्मशाला और सामाजिक विकास के कल्याणकारी कार्यों का सुचारू रूप से संचालन करते हैं।
ट्रस्टी मंडल का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम व सुखद बनाना है। मंदिर परिसर का आधुनिकीकरण एवं आध्यात्मिक परंपराओं का निर्वाह समिति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।